जलवायु परिवर्तन भारत को बना सकता है दूध और दालों का आयातक

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दिल्ली | जलवायु परिवर्तन के नतीजे आनेवाले समय में भयानक स्थिति का चित्र दिखा रहे है | हर साल जलवायु परिवर्तन के कारण भारत को करोडो डॉलर का नुकसान उठाना पड़ता है | इसके साथ ही 2020 के अंत तक जलवायु में भारी परिवर्तन से कृषि उत्पादकता पर बहुत बुरा असर देखने को मिलेगा |

हाल ही में संसदीय समिति में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कृषि मंत्रालय ने कहा कि प्रमुख फसलों की उत्पादकता अगले कुछ सालों में सीमित हो जाएगी | कई प्रमुख फसलों का उत्पादन अगले कुछ सालों में काफी कम हो जाएगा | लेकिन अगर जलवायु में विशेष रूप से परिवर्तन न हो तो इन फसलों का उत्पादन 10 से 40 फीसदी तक बढ़ सकता है | आगामी सालों में चावल, गेहूं, तिलहन, दालों, फलों और सब्जियों के फसलों की पैदावार में विशेष रूप से कमी आ सकती है | इसलिए किसानों को परिवर्तन के अनुकूल ही फसलों का चुनाव करना होगा | साथ ही फसलों की पैदावार में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण अपनी कृषि पद्धति में बदलाव लाना होगा |

जलवायु में अधिक परिवर्तन भारत को दूध और दालों का प्रमुख आयातक बना सकता है | साथ ही 2030 तक इस साल के अपेक्षित उत्पादन से 65 लाख टन अधिक अनाज की आवश्यकता हो सकती है | जलवायु परिवर्तन के कारण सोयाबीन, चना, मूंगफली, नारियल (पश्चिमी तट में) और आलू (पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में) की पैदावार में बढ़ोत्तरी होगी |

इसलिए सभी लोगों को आने वाली इस चुनौती को पहचानकर और किसी भी तरह से कार्बन डाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन कम करने के लिए प्रयासरत होना चाहिए | साथ ही स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी तकनीकों का आक्रामक स्तर पर बढ़ावा मिलना चाहिए |

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